शिक्षा में कला और साहित्य: एक व्यापक विश्लेषण
- लेखक
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कविता यादव
महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी, बरेली##default.groups.name.author##
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- संकेत शब्द:
- शिक्षा, साहित्य शिक्षा, सर्वांगीण विकास, कला, एकीकृत पाठ्यक्रम, रचनात्मकता
- सार
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कला और साहित्य का समागम शिक्षार्थिय़ो के समस्त विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शोध पत्र शिक्षा के क्षेत्र में कला और साहित्य की अवधारणा, प्राचीनतम विकास, दार्शनिक पृष्ठभूमि, चारो ओर से लाभ, शिक्षा का नजरिय़ा, पाठ्य़ समाग्री और कार्यान्वयन में आने वाली कठिनायियो और उसके समाधानों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। कला समेकित शिक्षा और साहित्य शिक्षण, जो रचनात्मकता, आलोचनात्मक, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देते हैं। परांपरिक प्रणाली से हटकर अनुभवात्मक और आनंदमय सीखने के परिवेश का निर्माण करते हैं ।
भारत और संसार में कला तथा साहित्य शिक्षा का एक समृद्ध इतिहास मानवता का महत्वपूर्ण अंग माना गया है । दार्शनिको के दृष्टिकोण से यह आत्मबोध, सांस्कृतिक समझ और नैतिक मूल्यों के विकास पर केंद्रित है । तत्कालीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) जैसे नीतिगत दस्तावेज कला और साहित्य को मुख्यधारा की शिक्षा में एकीकृत करने पर जोर देते हैं, ताकि ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के बीच अलगाव को समाप्त किया जा सके और विभिन्न विषयो की उन्नति मे सहायक सिद्ध हो सके।
हालांकि, पर्याप्त शिक्षक की कमी खारब प्रशिक्षण प्रणाली और परीक्षा-केंद्रित तरीका आदि कठिनाईया इसके कार्यान्वयन में रूकावट बनती है। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकारी प्रयास, नए शिक्षा की विधियाँ, सामुदायिक प्रयास महत्वपूर्ण हैं । यह शोध पत्र कला और साहित्य को शिक्षा के केंद्र में लाने के लिए, एक समग्र प्रयास है। और इससे एकीकृत समाज का निर्माण हो सके । शिक्षा एक ऐसे दृष्टिकोण को बढावा देता है , जिससे शिक्षार्थियो को 21वीं सदी के कौशल से परिपूर्ण किया जा सके, जिससे एक संवेदनशील, रचनात्मक तथा जागरूक समाज का निर्माण हो सके।
- Author Biography
- प्रकाशित
- 2025-09-30
- खंड
- Articles
- License
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