जूना महल, डूंगरपुर की चित्रकला: शृंगार, सौंदर्य और दर्शन का अद्वितीय संगम
- लेखक
-
-
Dr. Laxman Lal Sargada
श्री गुरु गोविंद राजकीय महाविद्यालय##default.groups.name.author##
-
- संकेत शब्द:
- जूना महल, डूंगरपुर, भित्ति चित्रकला, शृंगार रस, राजस्थानी स्थापत्य, चित्रकला शैली, कामसूत्र, स्त्री-पुरुष संबंध, राजसी जीवन
- सार
-
जूना महल, डूंगरपुर की चित्रकला राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, कलात्मक उत्कृष्टता और दार्शनिक दृष्टि का अद्वितीय उदाहरण है। यह महल केवल एक ऐतिहासिक भवन नहीं, बल्कि एक जीवंत कलादीर्घा है, जिसकी दीवारों पर अंकित भित्ति चित्र अतीत के जीवन, भावनाओं और सौंदर्यबोध को सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं। महल के भीतर विभिन्न प्रकार के चित्रों का समावेश है, जिनमें धार्मिक कथाएँ, राजसी जीवन, शिकार के दृश्य और प्रकृति के चित्रण के साथ-साथ शृंगार प्रधान चित्र विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। पाँचवीं मंजिल पर स्थित ये शृंगारिक चित्र स्त्री-पुरुष संबंधों की सूक्ष्म, संतुलित और मर्यादित अभिव्यक्ति प्रस्तुत करते हैं। इनमें प्रेम को केवल शारीरिक आकर्षण के रूप में नहीं, बल्कि भावनात्मक गहराई, आत्मीयता और सौंदर्य के रूप में दर्शाया गया है। इनकी प्रेरणा भारतीय परंपरा में वर्णित ‘काम’ के सिद्धांत से जुड़ी है, जिसे जीवन के चार पुरुषार्थों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
कलात्मक दृष्टि से इन चित्रों की रेखाएँ अत्यंत कोमल, प्रवाहमयी और जीवंत हैं। चित्रों को छोटे-छोटे पैनलों में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक पैनल एक स्वतंत्र दृश्य प्रस्तुत करता है, किंतु सभी मिलकर एक समग्र कथा का निर्माण करते हैं। पृष्ठभूमि में महल की वास्तुकला, झरोखे, पर्दे और सजावटी तत्वों का सूक्ष्म चित्रण चित्रों को अधिक यथार्थ और प्रभावशाली बनाता है। रंगों का प्रयोग भी अत्यंत प्रतीकात्मक है। लाल रंग प्रेम और ऊर्जा का, हरा शांति और प्रकृति का, नीला गहराई का और सुनहरा वैभव का प्रतीक है। इन रंगों का संतुलित संयोजन चित्रों की सौंदर्यता को और अधिक बढ़ाता है।
- Downloads
- प्रकाशित
- 2026-01-31
- खंड
- Articles
- License
-
Copyright (c) 2026 ART ORBIT

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License.
How to Cite
Most read articles by the same author(s)
- Dr. Laxman Lal Sargada, राजस्थान के संग्रहालयों में प्रदर्शित माटीशिल्प की समृद्ध परम्परा का समकालीन कला पर प्रभाव , ART ORBIT: खंड 2 No. 1 (2026): ART ORBIT ISSN 3107-670X
